रावघाट परियोजना पर बड़ा विवाद: BSP पर बिना अनुमति 500 से अधिक पेड़ काटने का आरोप, वन विभाग ने जारी किया नोटिस

बस्तर, छत्तीसगढ़। रावघाट लौह अयस्क परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है। वन विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि सड़क निर्माण के लिए बिना आवश्यक अनुमति प्राप्त किए 500 से अधिक पेड़ों की कटाई कर दी गई।
जांच टीम के अनुसार परियोजना क्षेत्र में लगभग 1340 मीटर लंबी और 9.95 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया गया है। आरोप है कि इस निर्माण कार्य के दौरान वन भूमि के नियमों को नजरअंदाज करते हुए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई और पहाड़ी क्षेत्र को भी काटा गया। प्रारंभिक जांच में 540 पेड़ों के काटे जाने की पुष्टि हुई है।
मामले को गंभीर मानते हुए वन विभाग ने भिलाई स्टील प्लांट (BSP) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। लापरवाही और निगरानी में कमी पाए जाने पर संबंधित एसडीओ और रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि पांच वनकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
45 गांवों में बढ़ा आक्रोश
दूसरी ओर रावघाट परियोजना से प्रभावित नारायणपुर और कांकेर जिले के 45 गांवों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना शुरू हुए लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े जो वादे किए गए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी सहमति और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना सड़क निर्माण के लिए सैकड़ों पेड़ काट दिए गए। उनका कहना है कि परियोजना के नाम पर क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने BSP प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो क्षेत्र में बड़े जनआंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
एक ओर वन विभाग की कार्रवाई और दूसरी ओर 45 गांवों के लोगों का बढ़ता विरोध, रावघाट परियोजना को लेकर विवाद को लगातार गहरा कर रहा है। अब सबकी नजर वन विभाग की आगे की कार्रवाई और BSP प्रबंधन के जवाब पर टिकी हुई है।
पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय अधिकार और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना अब इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।




