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छत्तीसगढ़बस्तर संभाग

रावघाट के जंगलों में आखिर किसकी अनुमति से गिरे सैकड़ों पेड़? खनन परियोजना, बीएसपी प्रबंधन और प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

जंगल के भीतर बनाई गई कई किलोमीटर लंबी सड़क, आठ वाहन जब्त; ग्रामीणों में नाराजगी, वन विभाग की जांच जारी।

अंतागढ़/नरायणपुर।
देश की महत्वपूर्ण लौह अयस्क परियोजनाओं में शामिल रावघाट परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला जंगलों में कथित अवैध पेड़ कटाई और बिना वैध अनुमति सड़क निर्माण का है। आरोप है कि लौह अयस्क के परिवहन को आसान बनाने के लिए जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर सड़क तैयार की गई, जबकि इसके लिए आवश्यक वन अनुमति और स्वीकृतियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, रावघाट रेलवे स्टेशन तक लौह अयस्क पहुंचाने के उद्देश्य से परियोजना क्षेत्र के घने जंगलों के बीच लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया। इस दौरान सैकड़ों पेड़ों की कटाई किए जाने की बात सामने आई है। मामला तब सुर्खियों में आया जब स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इसकी शिकायत वन विभाग से की।
जंगल के भीतर सड़क, लेकिन गांवों तक नहीं पहुंची जानकारी
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और पेड़ कटाई जैसे बड़े कार्यों की जानकारी उन्हें पहले नहीं दी गई। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि स्थानीय समुदाय को विश्वास में नहीं लिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, रावघाट परियोजना शुरू होने के समय क्षेत्र के लोगों से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के वादे किए गए थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि लोगों को लगने लगा है कि विकास की कीमत उनके जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को चुकानी पड़ रही है।
वन विभाग हरकत में, आठ वाहन जब्त
मामले की शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान सड़क निर्माण कार्य में लगे आठ वाहनों को जब्त किया गया। विभाग ने कटाई और निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेज भी अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि किसी एजेंसी या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उनके खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरणीय प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बीएसपी प्रबंधन ने दी सफाई
मामले में बीएसपी प्रबंधन का पक्ष भी सामने आया है। प्रबंधन का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक स्वीकृतियों के अनुरूप किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन किया गया है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि सभी अनुमति मौजूद थीं, तो फिर वन विभाग को कार्रवाई करते हुए वाहन जब्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
वन मंडलाधिकारी का स्पष्ट बयान
वन मंडलाधिकारी भानुप्रतापपुर ने कहा कि कंपनी अथवा बीएसपी प्रबंधन को पेड़ों की कटाई के लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति जारी नहीं की गई थी। उन्हें सड़क निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने की शिकायत मिली है, जिसकी जांच जारी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विकास बनाम पर्यावरण की बहस
रावघाट परियोजना लंबे समय से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती का प्रतीक रही है। एक ओर परियोजना को क्षेत्र की आर्थिक प्रगति और रोजगार से जोड़कर देखा जाता है, तो दूसरी ओर आदिवासी अंचल के जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं।
अब सबकी नजर वन विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि जंगलों में हुई पेड़ कटाई और सड़क निर्माण वैध प्रक्रिया के तहत हुए या फिर विकास की आड़ में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की गई।
फिलहाल रावघाट के जंगलों से उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास की रफ्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि स्थानीय समुदाय का विश्वास भी कायम रहे और प्राकृतिक धरोहर भी सुरक्षित रह सके।

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