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बस्तर संभाग
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नगरनार स्टील प्लांट का काला पानी बना किसानों और ग्रामीणों के लिए संकट, खेतों से लेकर घरों तक पहुंची तबाही

 

जगदलपुर। बस्तर जिले के नगरनार क्षेत्र में स्थित एनएमडीसी के स्टील प्लांट से निकलने वाला कथित केमिकल युक्त काला और बदबूदार पानी एक बार फिर विवादों में आ गया है। प्लांट के आसपास स्थित कई गांवों के किसान और ग्रामीण इस दूषित पानी से भारी परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी नालियों और सड़कों के रास्ते सीधे खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहा है, जिससे खेती, पर्यावरण और जनजीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार नगरनार स्टील प्लांट के पीछे स्थित गेट नंबर-3 के सामने से गुजरने पर समस्या की गंभीरता साफ दिखाई देती है। प्लांट से निकलने वाला काला पानी मुख्य सड़क पर बहते हुए खेतों और गांवों की ओर बढ़ रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण यह स्थिति और अधिक विकट हो गई है। सड़क पर पानी भर जाने से कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।

सबसे अधिक चिंता किसानों को अपनी खेती को लेकर है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान धान की फसल के लिए खेतों की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन इस वर्ष कई गांवों के किसान अपने खेतों में जुताई और रोपाई की तैयारी तक नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में जमा काले और बदबूदार पानी के कारण कृषि कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से प्लांट से निकलने वाला यह पानी लगातार खेतों में पहुंच रहा है, जिसके कारण जमीन की उपजाऊ क्षमता में गिरावट आ रही है। उनका आरोप है कि मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने से फसल उत्पादन कम हो रहा है और खेती की लागत बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में कृषि भूमि बंजर होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह समस्या केवल खेतों तक सीमित नहीं है। प्लांट के पीछे स्थित गांवों में कई घरों तक यह काला पानी पहुंच चुका है। घरों के आसपास और आंगनों में गंदा पानी जमा होने से दुर्गंध फैल रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा पशुपालकों के लिए भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि पालतू पशुओं को इस दूषित पानी से दूर रखना मुश्किल हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले उन्होंने कई बार प्लांट प्रबंधन को इस समस्या से अवगत कराया था। ग्रामीणों ने दूषित पानी के निकास की व्यवस्था सुधारने, नालों को बंद करने और पानी के शोधन की उचित व्यवस्था करने की मांग की थी। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बरसात से पहले आवश्यक इंतजाम किए जाते तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। अब बारिश के बीच यह काला पानी तेजी से गांवों और खेतों में फैल रहा है और लोग इसके दुष्प्रभाव झेलने को मजबूर हैं।

इस संबंध में जब एनएमडीसी प्रबंधन से संपर्क करने और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

बस्तर क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाओं से उत्पन्न प्रदूषण को लेकर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बचेली और किरंदुल क्षेत्र के लोग खदानों से निकलने वाले लाल पानी और प्रदूषण की समस्या को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। वहीं अब नगरनार क्षेत्र के ग्रामीण स्टील प्लांट से निकलने वाले काले पानी के कारण परेशान हैं।

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन तथा संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दूषित पानी के नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने और समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर केवल खेती और पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास और उद्योग जरूरी हैं, लेकिन इसकी कीमत किसानों की जमीन, पर्यावरण और ग्रामीणों के स्वास्थ्य से नहीं चुकाई जा सकती।

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