शिक्षा विभाग में हड़कंप: पदोन्नति अनियमितता मामले में पूर्व डीईओ अशोक पटेल सस्पेंड
दुर्गकोंदल में 6 करोड़ और भानुप्रतापपुर में 17 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला गरमाया, जांच से पहले एसीबी का पत्र वायरल होने से मचा हड़कंप।

कांकेर। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में है। कांकेर जिले के दुर्गकोंदल और भानुप्रतापपुर विकासखंड में स्कूल भवनों की मरम्मत के नाम पर करीब 23 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, दुर्गकोंदल विकासखंड में लगभग 6.63 करोड़ रुपये और भानुप्रतापपुर में 17.45 करोड़ रुपये की राशि स्कूल मरम्मत कार्यों के लिए जारी की गई थी। आरोप है कि कई जगहों पर बिना कार्य कराए भुगतान कर दिया गया, जबकि कुछ स्कूलों में केवल कागजों में मरम्मत दिखाकर सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई स्कूलों की छतें आज भी जर्जर हैं और बच्चों को तिरपाल के नीचे पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम क्यों दिखाई नहीं दे रहा है।
मामले में यह आरोप भी लगाए गए हैं कि जिन निर्माण कार्यों को स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से कराया जाना था, उन्हें नियमों को ताक पर रखकर राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों और कथित तौर पर कांग्रेस नेताओं को सौंप दिया गया। इससे पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
इधर, जांच की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही एसीबी का पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया, जिससे विभागीय गोपनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब एसीबी इस पहलू की भी जांच कर सकती है कि गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक कैसे हुए।
वहीं, पदोन्नति और पदस्थापना में अनियमितताओं के एक अन्य मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
अब पूरे जिले की नजर एसीबी की जांच पर टिकी है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह प्रदेश के शिक्षा विभाग से जुड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा सकता है और कई जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।




