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बस्तर विकास यात्रा

“बस्तर की सबसे पुरानी लैब… आज भी मरीजों की पहली पसंद” — डॉ. हेमंत कुमार पैथोलॉजी लैब

संघर्ष, सेवा और समर्पण की मिसाल — डॉ. साहब से विशेष बातचीत

 

 

1. डॉक्टर साहब, आपका बचपन कैसा था और डॉक्टर बनने का सपना कैसे देखा? परिवार का सहयोग कितना मिला?

मेरा बचपन बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह बीता। पढ़ाई, खेलकूद और दोस्तों के साथ समय गुजरता था। भविष्य को लेकर ज्यादा चिंता नहीं रहती थी। जब कभी इलाज के लिए अस्पताल जाते थे और डॉक्टरों की सेवा भावना व समर्पण देखते थे, तब मन में विचार आया कि हमें भी इसी क्षेत्र में लोगों की सेवा करनी चाहिए। परिवार, विशेषकर माता-पिता का हमेशा भरपूर सहयोग मिला।

2. पढ़ाई के दौरान किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? क्या कभी ऐसा लगा कि आगे पढ़ाई जारी रखना मुश्किल है?

हम मध्यमवर्गीय family से थे, इसलिए सुविधाएं सीमित थीं। लेकिन पिताजी ने कभी पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। स्कूल और कॉलेज की हर जरूरत पूरी की। यहां तक कि आठवीं तक गणित भी पिताजी ने खुद पढ़ाया। संघर्ष जरूर थे, लेकिन हिम्मत कभी नहीं टूटी।

3. करियर में आर्थिक परेशानियों का सामना कैसे किया? आपके जीवन का सबसे कठिन समय कौन-सा था?

सबसे कठिन समय वह था जब मैंने अपने क्षेत्र में निजी पैथोलॉजी लैब शुरू करने का निर्णय लिया। बैंक से लोन लेना था, लेकिन एक फील्ड ऑफिसर ने लगभग एक वर्ष तक घुमाया। वह कहते थे — “बस्तर में लैब खोलकर क्या करोगे?” लेकिन मैंने अपने लक्ष्य पर विश्वास रखा और हार नहीं मानी।

4. जब आपने पैथोलॉजी क्षेत्र में शुरुआत की, तब सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? लोगों का भरोसा जीतने में कितना समय लगा?

शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती लोगों का विश्वास जीतना था। समाज और मरीजों का भरोसा अर्जित करने में लगभग एक से दो वर्ष का समय लगा। लगातार ईमानदारी और समर्पण से काम करने के बाद लोगों का विश्वास मिला।

5. आपके जीवन का वह कौन-सा मोड़ था जिसने आपको अंदर से मजबूत बना दिया?

जीवन में जब-जब विपरीत परिस्थितियां आईं, तब मजबूती से डटे रहना ही सीखा। कॉलेज के शुरुआती दौर में हमारे एक सर को ब्लड कैंसर होने की डायग्नोसिस हुई थी। उस समय परिवार को संभालना, उन्हें मानसिक संबल देना और रायपुर ले जाकर इलाज करवाने जैसी परिस्थितियों ने जीवन को बहुत करीब से समझने का अवसर दिया। ऐसे कई अनुभवों ने मुझे अंदर से मजबूत बनाया।

6. आज आप जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने में सबसे बड़ी ताकत क्या रही? अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे?

सबसे बड़ा श्रेय मेरे मरीजों और उन लोगों को जाता है जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। इसके अलावा माता-पिता, पत्नी, बेटी, मेरे शिक्षक और शिक्षण संस्थानों का भी मेरे जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है।

7. जो युवा आज संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा —

“कर्म करते रहिए, फल की चिंता मत कीजिए।”
अपने काम से प्रेम कीजिए, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कीजिए, और परिस्थितियां कैसी भी हों, कभी हार मत मानिए।

8. आपकी लैब को जगदलपुर में लोग भरोसेमंद क्यों मानते हैं?

यह प्रश्न तो लोगों से ही पूछना चाहिए। शायद इसलिए कि जो भी मरीज यहां उम्मीद लेकर आते हैं, हम पूरी एकाग्रता और समर्पण के साथ उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करते हैं।

9. आपकी लैब में ऐसी कौन-सी सुविधाएं हैं जो अन्य जगहों पर कम देखने को मिलती हैं?

रक्त संबंधी जांचों के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था, पीसीआर टेस्ट और वायरल मार्कर जैसी उन्नत जांच सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं, जो छोटे शहरों में कम देखने को मिलती हैं।

10. मरीजों को आपकी लैब में जांच कराने से क्या विशेष लाभ मिलता है?

हम हमेशा कोशिश करते हैं कि मरीजों को न्यूनतम शुल्क में बेहतर और सटीक जांच सुविधा मिले। जरूरतमंद मरीजों की परिस्थितियों को देखते हुए कई बार जांच निशुल्क भी कर दी जाती है।

11. क्या गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए कोई विशेष सुविधा या छूट दी जाती है?

जी हां, आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को विशेष छूट दी जाती है। कई बार अत्यंत जरूरतमंद मरीजों की जांच पूरी तरह निशुल्क भी की जाती है।

12. कोई ऐसा केस जो आज भी आपको भावुक कर देता हो?

ऐसे कई मामले हैं। एक परिचित व्यक्ति में ब्लड कैंसर की पहचान हुई थी। उन्होंने मुझसे दवा लिखने को कहा। मैंने जांच रिपोर्ट देखकर दवा लिखी। बाद में बड़े शहर के विशेषज्ञ डॉक्टर ने भी कहा कि यही सही दवा है। वह क्षण आज भी यादगार है।

13. जो लोग समय पर इलाज नहीं कराते, उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

कुछ बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू और हृदयाघात में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर जांच और सही डायग्नोसिस न हो तो इलाज कठिन हो जाता है। इसलिए किसी भी बीमारी को हल्के में न लें और समय रहते जांच जरूर कराएं।

14. अगर कोई मरीज पहली बार आपकी लैब में आए तो उसे कैसा अनुभव मिलेगा?

हमारी कोशिश रहती है कि मरीज को ऐसा महसूस हो कि यह उसका अपना संस्थान है। उसे अपनापन मिले, बीमारी की सही जानकारी मिले और बचाव के उपाय भी समझाए जाएं।

15. ‘मोर माटी’ के माध्यम से जगदलपुर और आसपास के लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

नियमित व्यायाम, प्राणायाम, सुबह की धूप में पैदल चलना, हरी सब्जियां और फल खाना, तनाव से दूर रहना — यही स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है। यदि लोग अपनी दिनचर्या में इन बातों को शामिल करें, तो अधिकांश बीमारियों से बचा जा सकता है।

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